यह है पूरा मामला

याची की नियुक्ति वर्ष 1988 में अलीगढ़ स्थित हरदुआगंज थर्मल पावर प्लांट में हुई थी। सेवा में प्रवेश के समय मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उनकी जन्मतिथि 19 अक्टूबर 1967 दर्ज की गई थी, जो सभी आधिकारिक अभिलेखों में वर्षों तक बनी रही। इसी आधार पर उनकी सेवानिवृत्ति 31 अक्टूबर 2027 तय थी।

बिना सूचना जन्मतिथि बदल दी गई 

विवाद तब खड़ा हुआ जब लगभग 35 साल बाद विभाग ने बिना सूचना दिए उनकी जन्मतिथि में बदलाव कर दिया। सेवा पुस्तिका में व्हाइटनर लगाकर पुरानी तिथि हटाकर 14 अप्रैल 1966 दर्ज कर दी गई और इसके आधार पर उन्हें 30 अप्रैल 2026 को रिटायर करने का आदेश जारी कर दिया गया। विभाग ने इसके लिए एक पुराने ट्रांसफर सर्टिफिकेट का सहारा लिया।

सेवा में प्रवेश के समय दर्ज जन्मतिथि अंतिम मानी जाएगी

अदालत ने इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया। कहा, सेवा में प्रवेश के समय दर्ज जन्मतिथि ही अंतिम मानी जाएगी, विशेषकर जब कर्मचारी उस समय हाईस्कूल पास न हो। बाद में प्राप्त प्रमाणपत्रों के आधार पर इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।

कोर्ट का याची को सेवा में बहाल रखने का निर्देश

 

कोर्ट ने सेवानिवृत्ति संबंधी विभागीय आदेश रद करते हुए याची को सेवा में बहाल रखने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी कहा कि यदि विभाग चाहे तो नियमानुसार जांच पूरी कर सकता है, लेकिन बिना प्रक्रिया की गई कार्रवाई मान्य नहीं होगी।